१ जेष्ठ २०८३

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    शिव शंकरके बुटी

    शिव शंकरके बुटी

    बन्वामे जमल तमान जडिबुटी मनसे एकठो जडिबुटी बा । जिहीहे जाँरक विरुवा कहि जाइठ । उ जाँरक विरुवक कोइ जर कोरके नानट टे उखारके, चाहे जैसिक नन्लेसे मने काम लग्ना ओकर जरे हो । जरहे घामम सुख्वाके ढेकीम कुट्के मसिना बनाके, चाहे जरहे पिस देउ । जैसिकफे जरहे मसिना बनैना बा । जरहे मसिना बनाके खुदीक पिठामे सानके उहिहे कण्डाहस भौरी पारके, ठप्ठ्याके घामम सुख्वाइ परठ । सुख्वाके सेकबो टे जाँरक विरुवा पूर्ण रुपमे तयार हुई जाइठ । जिहीहे कठै मनै जाँरक विरुवा ।
    जाँरक विरुवासे जाँर बनाइक लाग बत्ला या बत्लीमे जाँरक नाउँसे भात रिझाके चाहे खाके उब्रल भातमे जाँरक बिरुवा घाँसके फेन जाँर बनैठै । बटला या कौनो भाँरामे भात रिझाके टट्ले भात केरक पत्तम या जेमे फेन अख्न्याइ परठ । जाँरक विरुवाहे खुरबुश्नी पारके ओहे टट्ले भातमे जाँरक विरुवा खोब खसमोरेक परठ । खस्मोरके सेक्के कोइ छिटुवामे बरसाटी बिसाके ढरठै टे कोइ भुँइयामे बरसाटी या केरक पट्टा बिछाके ढरठै । बिना बरसाटी बिछैले ढरबो टे जाँरक झोर चुनाह ढर रहठ । छिटुवामे ढारके खोब मजासे बरसाटीसे सेह्रके उप्परसे चकियासे डबाके ढारक परठ । कौनो जाँर महा जल्डी बन जाइठ टे कौनो एक, दुई दिन लागजिठीस । जाँर हुइठ टे बास देहे लागठ । नइ टे चिख्के पता चल जाइठ । जाँर तयार हुइल कहिके । जाँर तयार हुइठ टे कठै जाँर उठ्गील आब । तब उही कठै जाँर । उठल जाँरहे कोइ प्लाष्टिक डब्बामे ढरही टे कोइ भोकरीमे । ओहे ढारल जाँर पिनास मन लागलमे बनकससे, फाँटल चिँठल टापीसे या कौनो चिजसे झाब्के पिना चलाऊ बा । कत्रा झब्लेसे अत्रा मनै पुगब कना अड्कल करे परठ । तब ओहे अनुुसार जाँर झाबे परठ । बनकस ओ टापीसे जाँर झब्ना कलक जाँरेमनिक सिठ्ठा निकरना हो । कोइ बनल जाँरहे घिघोरवाके रुपमे पियठ टे कोइ कहठ घल्हका नान टे । जाँरहे कोइ जम्मा पि जाइठ टे कोइ डारु बनाइक लाग ढरले रठै । जाँरहे कोइ आमिल बटाइ टे कोइ चुच्वाइल बा कहि कोइ गुरी जाँर बा कहिके कठै ।
    डारु कना एक प्रकारके तरल पदार्थ हो । डारु बनाइक लाग बट्ला, बट्ली, डाेंरया चाहठ । सबसे टरे बट्ला, डोंरया, बट्ली क्रमशः ढारल रहठ । बट्लामे डारु बेठैना जाँर ढारल रहठ, बिच्चे डोंरया ढारल रहठ, आउर बट्लीमे उप्पर पानी ढारल रहठ । आगी करलेसे जाँर मनिक शक्ति ढिकके बाफ बन्के पानी रहल बट्लीमे परठ ओ ओहे ढिरेसे डोरयामे आके डोंरयक डण्डी–डण्डी पानीके रुपमे आके करैमे या बोतलमे चुहाइ सेक जाइठ । कौनो डोंरयामे डारु भित्रे जम्मा हुइना बनाइल रहठ । जौन डारु एकदम तेज रहि टे उ डारु आगीम भ्वाङसे डमक जाइठ । सब फिल्टर होके आइल तरल पदार्थहे डारु कहि जाइठ ओ डारु कहिके चिन जाइठ । डारुमे चिनी डारके मिठैया डारु बनाइ सेक जाइठ । मौहृवा डारके मौहृवारी डारु बनाइ सेक जाइठ । डारुफे कौनो महा तेज, कौनो झरस्याँन, कौनो आमिल, कौनो गोडामिल रहठ । यी टे शिव शंकरके बनाइल बुटीसे जाँर डारु ।
    आब कथा÷बट्कोही सुनी । शिव शंकरके बुटी÷जडिबुटीसे बनाइल जाँर डारुके सुहावन कहानी । टब बक जमानक बाट हो । भगवान सक्कु जहान काम बाँट्के काममे खटा डरनै । काम किल काहे करैना हो कहिके एक दिन पार्टी खवैना सोच बनैठै । काम टे कामे हो जिन्गी भर काम करके किल कहाँ हुइ । कहाँटक औरे जनहनहे काम किल करैना हो कना सोच भगवानके अइठीन । तब्बेसे पार्टीके आयोजना बनैठै भगवान । सबके इच्छा, चाहना रहठ । मजा खाउँ, मजा लगाउँ, मोज मस्ती करु कना । बह्रियासे जिन्गी गुजारा चलाउँ कना । हमारफे ओहे चाहना, इच्छा बा भगवान कठै । औरे जाने कहाँसम कामे किल करही । काम करलक दुःख बिश्रावन कुछ–कुछ टे पार्टी करे परल । देहे परल । तबेमारे हम्रे काहे काम किल करवैना । उहाँहुकनहे कुछ मनोरञ्जन, राहरङगी,सयर कराई । जिन्दगीके मजा लेहवाई । कुछ देब खवाब टब टे काम करुइयनहे काम करे बेर फेन मजा लग्हिन कना हिसावसे भगवान सक्कु जनतनहे पार्टी देना सल्लाह करठै । सब जाने पालिक पाला आपन शक्ति अनुसारके भक्ति लगाके सब जनहन सेक्नासम खैना पिना खवैठै । आपन पाला अनुसारके खाना खवाके आब पाला अइठिन शिव शंकर भगवानके ।
    सब भगवान आपन पाला अनुसारके साधारण मनैनहे, काम करुइया किसाननहे, आपन इष्टमित्रहुकनहे पालिक पाला सक्कु जनहन पार्टी डेठै । शंकरकेफे पाला अइलक ओरसे पार्टी डेनाके तयारी टामझाम करठै । शिव पार्वती आपन सेक्ना अनुसारके सक्कु टामझाम तयार परठै । सब भगवानके नन्हे कुछ कमी नइ हुइना हिसावसे लागल रठै तयारीमे । जब टामझाम तयार करके सेक्ठै । सक्कु जनहन खवैना बिचार हुइठीन । एक जनहनफे नइ छोरके खवैना सल्लाह करठै । जहाँसम सेकब ओहैसम सक्कुहुन खवाब कना विचार हुइठीन । आपन गोस्याहे पार्वती कठै– जाउ टु आज जहाँसम पुगे सेक्बो सक्कु वहाँ पुग्हो । सब जनहन एक नइ छोरके बाल बच्चनसे लेके सब जनहन बलाइहो आउर नेउटहो कठै पार्वती शिव भगवानहे । शिव भगवान चल परठै पार्टीके नेउटा नेउटे । एक नइ छोरके सब जहान नेउटठै । नेउटके घरे अइठै । दोसर दिन पार्टी खउइयनके लाम लागल अइना काम चालु हुइठीन । आपन मनका सक्कुजे खइठै । हिक्षा पुर करके खैठै । औरे भगवानके जस्टे बदनाम नइ हुइना हिसाबसे खवैठै । मने का हुई जत्रा खवाउ सबके चाहल अनुसार खवाई नइ सेकजाइट । एक ना एकजे बदनाम करी डरठै । ओस्टके शंकर भगवान पार्टी खवाके सेक्ठै । आब सब जाने लग्गे टे मजाके खैली कना हुइलै । मने यीने मजासे खैलै कि नइ खैलै कना बात आपन संघरियनसे डगरीम जरुर बत्वैही आउर बात करही कना मनसायसे पार्टी खउइयनके चिमा लागे चलजिठै । शिवालय मनसे आइट आइट डगरीम बन्वा परठीन । शंकर भगवाना बन्वामे आके डग्रीटर नुकके खोब बात ओनइठै । केउ का बत्वाइट टे कोइ का ? कोइ कहट यी नइ पुगल, कोइ कहट उ नइ पुगल । केउ कहट शंकर भगवान पार्टी खवैना टे खवैनइ । मने जाँर डारु नइ खवैनइ टे कुछ नइ खवैनइ कना बात अइठीन । लगभग जम्मा जनहनके मुहसे ज्यादासे ओहे बात निकरठीन । यी भात टिना टे जौन भगवानफे खवैनइ । मने मजा नइ आइल । कुछ औरे भगवानसे नयाँ नौलो खवैटै टे मजा आइट कना बात करठै । शंकर भगवान जाँर डारु खैना मनै । जाँर डारु पला रठीन । उहाँहुकनके झुन जाँर डारुके अस्रा रठिन । तब शंकर भगवान आपन कैलाशमे जाके फेनसे पार्वतीहे पार्टी डेना बात करठै । फेनसे तयारी करठै । फेनसे जम्मा जनहन बलैठै । सक्कुजे आपन चाहल अनुसारके भात, टिना, खैठै । भात खउइया भात खैठै । जाँर पिउइया जाँर पिठै । आपन मागन अनुसार जाँर, डारु, निघाँर, जाँरक झोर, छबुवा, डबुवा, भात, टिना खैठैं पिठै । मस्तसे साँझके घरे चल जिठै । जाँर पिउइयनके रात हु जैठिन । ढिरेसे जाँर, डारु पियट–पियट । फेन चिमा लागे जैठै । सबजे आपन आपन बात बत्वइठै मने गुनासो भर अक्को नइ पोख्ठै ।
    शंकर भगवान पार्टी खवैलक चिमा लागके प्रतिक्रिया बुझ्लक ओरसे औरे भगवानसेफे मजासे पार्टी खवैनइ कना बात फैलठ । और भगवान भर पार्टी खवाके प्रतिक्रिया नइ बुझ्लक कारण मै पार्टी कैसिक खवैनु कना पता नइ चल्ठिन । तबेमारे प्रतिक्रिया लेना, बुझ्ना जरुरी बा । शंकर भगवानके भर एक काम गरबर हुइल रठिन । जाँर डारु पिके मत्वार हुउइयनके गिरके आँखी फुटगील रठीन, केक्रो कहाँ चोट लागल रठिन टे केक्रो कहाँ । उहाँहुकनके मेधारु शंकर भगवान ओ पार्वतीहे गरयाइ आइ लग्ठिन । पार्टी खवाके मोर मेधारुक आँखी फोरवा डेलो । आब मै उकिहिन कैसिक पालम । कहाँटक स्याहार सुसार करम । तब जाके पार्वती शंकर भगवानहे गरयाइ लग्ठै । जाँर, डारु, भाङ, गाँजा बनाके खाइ जन्लो यकर उपाय भर बनाइ नइ जन्लो । तब शंकर भगवान कठै कि जाउँ आबसे जाँर डारु जत्रा पिही मने ओकर आँखीम भर कबु चोट नइ लग्हीस भले भाँउ फुटजिहीस मने आँखी भर नइ फुटीहीस कना वरदान, वचन, आशिष डेठै ।
    शिव शंकरके बुटीफेन आब कभु नइ छुटी ।
    जाँर डारु पिके आब घिबिर घिबिर मुटी ।
    मौहृवारी, स्पेशल घरैया जाँर डारु लगाके
    मड्वा मनैया आब दिन उठ्वा लाग सुटी ।
    जबसम जाँर डारु नइ पिई तबसम पटा नै
    डारुके नशामे जुम्के आब दुनियाँहे लुटी ।
    जाँर डारुमे मत्वार कैना महा शक्ति रहठ
    यहे विरुवाहे कठै आब शिव शंकरके बुटी ।
    शिव शंकरके बुटी कभु नइ छुटी कना टुक्कासे शंकर भगवानके बुटीसे बनाइल जाँर, डारुके मट्वार कबु नइ छुटी कना अर्थ देहठ । जबसे शंकर भगवान मुह फोरके जाँर, डारु पिउइयनहे बरदान देनै ओठ्ठसे जाँर, डारु, निघाँर, गाँजा, भाङ पिउइयनके आँखीम चोट नइ लग्ठिन कना किवदंटी बा । भगवानके खवाइल पार्टी मनसे खोट निकर जिठीन कलेसे साधारण ओ धनी मनैनके खवाइल पार्टी मनसे खोट निकरना टे स्वाभाविक हो । पार्टी कना चाहे जत्ना मजासे खवाउ एक ना एक चुटी खोट, नइ मजा हल्ला, बदनाम हुई जाइठ कना सन्देश यी काथा मार्फत पह्रके जाने सेक्ठी । अट्रै हो बात अट्रै हो चिट । हसिया लेबो कि बेट ? बेट । टोँहार आउर मोर सदा दिन भेट । धन्यवाद
    ओराइल
    दुर्जन कुमार चौधरी
    गदरिया–६, बेनौली कैलाली ।

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